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Thursday, June 17, 2021

कीबोर्ड क्या है? यह कितने प्रकार के होते हैं

 कंप्यूटर के इनपुट डिवाइस कीबोर्ड की पूरी जानकारी हिंदी में


हार्डवेयर (Hardware)

कंप्यूटर के सभी कलपुर्जे, भागो, उपकरणों आदि को हार्डवेयर कहा जाता है हार्डवेयर को हम आंखों से देखते तथा हाथों से छू सकते हैं हार्डवेयर स्वयं कोई कार्य नहीं करता इससे कार्य कराने के लिए सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया जाता है कंप्यूटर के में प्रयुक्त होने वाली हार्डवेयर का वितरण निम्न प्रकार है।

इनपुट डिवाइस/युक्तियां (Input Devices)

वे युक्तियां जिनका प्रयोग उपयोगकर्ता के द्वारा कंप्यूटर को डाटा और निर्देश को प्रदान करने के लिए किया जाता है इनपुट युक्तियां कहलाती है इनपुट युक्तियां उपयोगकर्ता (User) से इनपुट लेने के बाद इसे मशीनी भाषा में परिवर्तित करके सीपीयू के पास भेज देती है।

एक अच्छे डेटा इनपुट के लिए चार महत्वपूर्ण विशेषताएं है —

  • समयबद्धता (Timelines)
  • शुद्धता और (Accuracy and)
  • संभावित उपयोगिता (Potential Usefulness)
  • स्रोत दस्तावेज़ (Source Document)
(1) समयबद्धता– समय पर डेटा वह डेटा है जो कार्रवाई के लिए पर्याप्त तेज़ी से एकत्र और संसाधित किया जाता है। उदाहरण के लिए, बिजली विभाग में ऑन-लाइन सिस्टम में वोल्टेज और करंट का डेटा लगातार इनपुट होता है। जब भी वोल्टेज या करंट का डेटा खतरे के निशान से नीचे या ऊपर होता है, यानी डेटा को भी एक साथ प्रोसेस किया जाता है। अलार्म चालू हो जाता है और पूरा सिस्टम बंद हो जाता है ।

(2) शुद्धता– अलार्म को चालू करने के लिए सूचनात्मक जरूरतों को सहेजने के लिए डेटा सटीक होना चाहिए। उदाहरण के लिए, अलार्म किसी अन्य पर नहीं चलना चाहिए जो निर्दिष्ट मान के बराबर नहीं है।

(3) संभावित उपयोगिता– डेटा कच्चा होता है और तब तक किसी काम का नहीं होता जब तक कि यह तार्किक, आवश्यकता से संबंधित न हो। जब इस डेटा को संसाधित किया जाता है तो यह एक जानकारी बन जाती है जो निर्णय लेने में मदद करती है। तो कम्प्यूटरीकृत इनपुट की तैयारी उपयोगी जानकारी के निर्माण में पहला कदम है।

(4) स्रोत दस्तावेज़– अधिकांश व्यावसायिक सूचना प्रणालियों में, स्रोत दस्तावेज़ मैन्युअल रूप से तैयार किए जाते हैं। स्रोत दस्तावेजों के उदाहरणों में कर्मचारी आवेदन पत्र, जमा पर्ची, चालान और बिक्री टिकट शामिल हैं।

कुछ प्रमुख इनपुट युक्तियां जो निम्न है:—

की-बोर्ड (Key-Board) 

यह इनपुट का महत्वपूर्ण उपकरण है जो टाइपराइटर के समान दिखाई देता है किसी भी टेक्स्ट या डाटा निर्देश इसी के द्वारा कंप्यूटर को दिए जाते हैं इस पर अक्षर, अंक और संकेत लिखे होते हैं जिन्हें कीज कहते हैं ।इसका प्रयोग कंप्यूटर में डाटा एवं निर्देश को कंप्यूटर की मेमोरी तक पहुंचाने में किया जाता है । यह कीबोर्ड में 104 की कीज होते हैं ।

कुछ विभिन्न प्रकार के कीबोर्ड जैसे— QWERTY, DVORAK और AZERTY मुख्य रूप से प्रयोग किए जाते हैं‌।

लाभ (Advantages)

  • चूंकि इसे मैन्युअल रूप से तैयार किया जा सकता है इसलिए इसे किसी कंप्यूटर पृष्ठभूमि या प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं है। 
  • स्रोत दस्तावेज़ कंप्यूटर फ़ाइलों के लिए बैकअप के रूप में काम कर सकते हैं। यह कंप्यूटर फ़ाइल बनाने के लिए स्रोत दस्तावेज़ के उपयोग के कारण है, इसलिए स्रोत दस्तावेज़ का उपयोग फ़ाइल को गलती से क्षतिग्रस्त या नष्ट होने की स्थिति में फिर से बनाने के लिए भी किया जा सकता है। 
  • स्रोत दस्तावेज़ प्रामाणिकता का प्रमाण प्रदान करने में मदद करता है। 
  • स्रोत दस्तावेज़ एक ऑडिट ट्रेल स्थापित करते हैं। ऑडिट ट्रेल घटनाओं के अनुक्रम को जोड़ने वाले तार्किक पथ के रूप में डेटा है, जिसका उपयोग रिकॉर्ड की सामग्री को प्रभावित करने वाले लेनदेन का पता लगाने के लिए किया जाता है। 

नुकसान (Disadvantages)

  • स्रोत दस्तावेज़ शायद ही कभी मशीन पठनीय होते हैं। इसलिए, स्रोत दस्तावेज़ डेटा को संसाधित करने के लिए, डेटा को बाइनरी रूप में स्थानांतरित किया जाना चाहिेए।
विशेषताएं (Featured)

  • इसके द्वारा डाटा को कंप्यूटर में सही तरीके से भेजा जा सकता है‌।
  • इसमें विभिन्न प्रकार के डाटा को भेजा जा सकता हैं।

Types of keyboard कीबोर्ड के प्रकार—

  1. Normal Keyboard (साधारण की-बोर्ड)
  2. Wireless Keyboard (तार रहित की-बोर्ड)
  3. Ergonomic Keyboard (एर्गोनोमिक की-बोर्ड)

1) Normal Keyboard– इस सामान्य प्रकार के कीबोर्ड का उपयोग सबसे ज्यादा होता है। ये एक साधारण सा कीबोर्ड होते है इसमें टोटल 101 बटन होते है।



2) Wireless Keyboard– इस की-बोर्ड को किसी भी कंप्यूटर में कनेक्ट करने के लिए वायर की जरुरत नहीं पड़ती है। इसे कंप्यूटर या लैपटॉप में ब्लूटूथ तकनीक द्वारा जोड़ा जाता है। और इनमे बैट्री लगती हैं जो एक निश्चित समय तक चलती है। और इसके बाद इसे बदलना पड़ता है।



3) Ergonomic Keyboard– इस प्रकार के कीबोर्ड अधिकतर अंग्रेजी के अक्षर वी [V] के आकार के बनाये जाते है। इनका मुख्य उद्देश्य हाथों के तनाव को कम करना है। इसका डिजाइन थोड़ा टेढ़ा मेढा होता है इस कीबोर्ड के निचे की तरफ कुछ जगह ज्यादा होती है। इसमें साधारण की-बोर्ड के मुकाबले ज्यादा बटन होते है।



इन तीनों मुख्य की-बोर्ड के अतिरिक्त बाजार में उपयोग के आधार पर और भी कीबोर्ड उपलब्ध हैं जो निम्न है—

  • Flexible Keyboard
  • Projection Keyboard
  • Gaming Keyboard
  • Mechanical Keyboard
  • Membrane Keyboard
  • Multimedia Keyboard आदि।


Types of keyboard Keys की-बोर्ड कीज के प्रकार–

  1. Alphanumeric keys
  2. Numeric keys
  3. Function keys
  4. Special purpose keys
  5. Modifier keys
  6. Arrow keys
  7. Other Keys 

(1) Alphanumeric keys– (A से Z एवं a से z) इन कुंजियों को अकेले दबाने पर अंग्रेजी वर्णमाला के छोटा (Small) अक्षर टाइप होता है तथा शिफ्ट (Shift) के साथ दबाने पर बड़ा (Capital) अक्षर टाइप होता है इसकी कुल संख्या 26 है।

(2) Numeric keys – वर्णमाला कुंजियों से ऊपर की कतार में संख्या कुंजियां होती है इन कुंजियों से 0 से 9 तक के अंक टाइप किए जाते हैं ।

(3) Function keys – यह कुंजीयां कीबोर्ड में सबसे ऊपर स्थित होता है यह F1 से F12 तक होता है इन कीज का प्रयोग अलग-अलग सॉफ्टवेयर में अलग-अलग कार्यों को संपादित करने के लिए किया जाता हैं।

(4) Special purpose keys – वे कुंजियां कुछ विशेष कार्यों को करने के लिए प्रयोग में ली जाती है।

  • Start Key – इसके द्वारा हम कंप्यूटर के सभी प्रोग्रामों की लिस्ट देख सकते हैं।
  • Enter Key – यह हमारे द्वारा तैयार किए गए किसी आदेश को कंप्यूटर में भेजने का कार्य करता हैं।
  • Home Key – यह कर्सल को लाइन के आरंभ में ले जाता है।
  • End Key – यह कर्सल को लाइन के अंत में ले जाता है।
  • Page Up Key – यह कर्सल को एक पेज पहले ले जाने के लिए किया जाता है।
  • Page Down Key – यह कर्सल को एक पेज आगे (बाद में) ले जाने के लिए किया जाता है।
  •  Backspace Key – यह स्क्रीन पर एक-एक अक्षर को मिटाने हुए कर्सल को बाई ओर ले जाता है।
  • Space Bar Key – यह की-बोर्ड की सबसे लंबी कुंजी होती है इसका उपयोग एक खाली स्थान छोड़ने के लिए किया जाता है।
  • Delete Key – यह कर्सल की ऊपर उपस्थित अक्षर को मिटाने का कार्य करता है।
  • Tab key – यह कर्सल को 5-5 स्थान दाएं से बाएं ओर ले जाने का कार्य करता है‌।
  • Esc Key – यह कंप्यूटर प्रोसेसिंग के दौरान रोकने का काम करता है।

(5) Modifier keys – इनमें तीन कुंजियां होती है जिनको अकेले दबाने से कोई कुछ नहीं होता पर किसी अन्य कुंजी के साथ प्रयोग करने पर उन कुंजियों के इनपुट बदल जाती है।

  • Ctrl Key – इस कुंजी का उपयोग किसी विशिष्ट उद्देश्य को करने के लिए अन्य कुंडलियों के साथ संयुक्त रूप से किया जाता है। जैसे— Ctrl+A, Ctrl+C ।
  • Alt Key – इस कुंजी का भी उपयोग कंट्रोल कुंजी की तरह कुछ शॉर्टकट आदेशों में किया जाता है।
  • Shift Key – यह संख्या में दो होती है इसका उपयोग अंग्रेजी वर्णमाला के बड़े अक्षर टाइप करने के लिए किया जाता है यदि किसी कुंजी पर दो चिन्ह छपे हैं तो शिफ्ट के साथ दबाने पर ऊपर का चिन्ह टाइप होता है

(6) Arrow  keys – यह कर्सल को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाती है यह कर्सल को ⬆️ऊपर Up, ⬇️नीचे Down, ⬅️दाएं Left, ➡️बाएं Right ले जाती है।

(7) Other Keys – उपयोग करने वाले कुंजियां के अतिरिक्त कीबोर्ड में अन्य कुंजियां होती है जैसे— Pause/Break, Print Screen, Scroll Lock आदि। इसका विशेष उपयोग होता है।


Tuesday, June 15, 2021

कंप्यूटर में वायरस और एंटीवायरस की जानकारी हिंदी में || Virus and Antivirus in hindi

वायरस एवं एंटीवायरस (Virus and Antivirus)

 कंप्यूटर वायरस ऐसे प्रोग्राम होते हैं जो हमारे कंप्यूटर को नुकसान पहुंचाते हैं यह प्रोग्राम इंटरनेट, फ्लॉपी, सीडी, पेन ड्राइव आदि के द्वारा एक वायरस से ग्रसित (Infected) कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर पर कॉपी हो जाते हैं ।

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Computer Virus

इसके मुख्य लक्षण निम्न है—

  1. सॉफ्टवेयर का सही ढंग से काम ना करना ।
  2. कंप्यूटर का रिबूट ना होना ।
  3. कंप्यूटर की गति कम हो जाना । 
  4. हार्ड डिस्क का स्वत: ही फॉर्मेट हो जाना ‌
  5.  प्रोग्राम्स का कार्य नहीं करना । 
  6. स्क्रीन पर बेकार सूचनाएं प्रदर्शित करना ।
  7. फाइलों के आकार को परिवर्तित कर देना । 
  8. कीबोर्ड की कुंजियां का कार्य बदल देना आदि ।
  9. कंप्यूटर की वायरस से सुरक्षा (Protection of Computer From Virus)


कंप्यूटर वायरस प्रोग्राम से अपने कंप्यूटर को बचाने के उपाय निम्न है—

  1. प्रोग्राम में ली जाने वाली फ्लॉपी, पेन ड्राइव या सी.डी. को जांच ले कि वह वाइरस से ग्रसित तो नहीं उसे स्कैन करने के बाद ही काम में ले।
  2. कंप्यूटर में वायरस से सुरक्षा के लिए पहले से ही एंटी वायरस प्रोग्राम्स इंस्टॉल करवा ले जिससे वाइरस का हमला होते ही कंप्यूटर आपको सूचित(Alert) कर दे ।
  3. अपंजीकृत या अवैध (Pirated) सॉफ्टवेयर के प्रयोग से बचें ‌।
  4.  इंटरनेट से यदि कंप्यूटर जुड़ा है तो ई-मेल के साथ भी वायरस प्रोग्राम एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर पर आ जाते हैं यह भेजे जाते हैं इससे बचाव के लिए एंटीवायरस प्रोग्राम क्या उपयोग करें जिससे वह आपको समय-समय पर सूचित (Alert) कर देगा ।
  5. समय-समय पर एंटीवायरस प्रोग्राम को अपडेट करवाते रहना चाहिए। एंटीवायरस के बिना कंप्यूटर में बग आने की सम्भावना बहुत ज्यादा होती है।


एंटीवायरस प्रोग्राम (Antivirus Program)

कंप्यूटर को वायरस से बचाने के लिए वायरस को हटाने के लिए‌ व एंटीवायरस प्रोग्राम को काम में लेते हैं यह प्रोग्राम कंप्यूटर में वायरस आने के बाद में वायरस हटाने का कार्य भी करते हैं। या इन्हें पहले से कंप्यूटर में इंस्टॉल कर दिया जाए तो समय-समय पर यह हमें वायरस हमलों से सावधान कर देते हैं एवं हमारे कंप्यूटर को सुरक्षा प्रदान करते हैं ।

कुछ प्रमुख एंटीवायरस प्रोग्राम जो निम्न है—

  • McAFee
  • Kaspersky
  • Avira
  • Avast
  • AVG
  • Norton Antivirus
  • Bitdefender 
  • PC Protect
  • Panda
  • Comodo
  • Bull Guard
  • E-set
  • 360 Total Security
  • Microsoft Window Defender



एंटीवायरस प्रोग्राम के फायदे (Advantages of Antivirus Program)

  1. एंटीवायरस से कंप्यूटर में वायरस आने की सम्भावना बहुत कम हो जाती है ।
  2. यह हमारी कंप्यूटर के सारे डेटा को सुरक्षित रखता है ।
  3. कंप्यूटर में वायरस का आक्रमण होते ही आपको सूचित कर देता है ।
  4. कंप्यूटर के सारे सॉफ्टवेयर आसानी से रन कर पाते हैं ।
  5. कोई भी हमारे कंप्यूटर से डाटा को इंटरनेट के माध्यम चुरा नहीं सकता ।
  6. किसी भी सॉफ्टवेयर को आसानी से इंटरनेट से डाउनलोड कर सकते हैं, जिसे वाइरस का खतरा नहीं होगा ।
  7. इससे हमारा कंप्यूटर कभी Hang और Slow नहीं होता ।
  8. इससे हार्ड डिस्क का खराब होने की संभावना कम होती है ।
  9. कंप्यूटर का प्रोसेसिंग स्पीड बढ़ जाता है और सिस्टम कभी क्रश नहीं होगा आदि ।


Monday, June 14, 2021

कंप्यूटर की अवधारणा || Computer ki aavdharana kya hai

कम्प्यूटर की अवधारणा ( Computer System of Concept)

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Concept of Computer

कम्प्युटर एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है। जो यूज़र द्वारा इनपुट किये गए Data में प्रक्रिया करके सूचनाओ को Result के रूप में प्रदान करता हैं अर्थात् कम्प्युटर एक Electronic Machine है जो यूज़र द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करती हैं । इसमें डेटा को स्टोर, पुनर्प्राप्त और प्रोसेस करने की क्षमता होती है ।

सिस्टम (System)– 

एक या एक से अधिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए कार्यरत इकाइयों के समूह को सिस्टम कहते हैं ।

कंप्यूटर हार्डवेयर (Computer Hardware)– 

कंप्यूटर के वे भाग जिन्हें हम देख एवं छु सकते हैं, कंप्यूटर हार्डवेयर कहलाते हैं। जैसे :- Keyboard, Mouse, Printer, Scanner, Monitor, C.P.U. etc.

कंप्यूटर सॉफ्टवेयर (Computer Software)– 

कंप्यूटर के व भाग जिन्हें हम देख एवं छु नहीं सकते हैं, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर कहलाते हैं। जैसे :- MS-Word, MS-Excel, MS-Power, Photoshop, PageMaker, etc.

कंप्यूटर फर्मवेयर (Computer Firmware)– 

ऐसे सॉफ्टवेयर जो हार्डवेयर के रूप में रोम (ROM) में संग्रहित किए जाते हैं फर्मवेयर कहलाते हैं। जैसे- BIOS (बेसिक इन आउटपुट सिस्टम) प्रोग्राम, यह प्रोग्राम कंप्यूटर बूटिंग में सहायक होते हैं।

यूज़र (User)– 

वे व्यक्ति जो कंप्यूटर चलाते हैं या कंप्यूटर पर काम करते हैं  उसे User (उपभोक्ता) कहते है ।


कम्प्युटर की कार्य प्रणाली (Working Process of Computer System)


कंप्यूटर सॉफ्टवेयर कितने प्रकार के होते हैं || Computer software kitne prakar ke hote hai

 कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर (Computer Software)

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Computer Software

कंप्यूटर सॉफ्टवेयर प्रोग्रामों का समूह होता है जिसका कार्य कंप्यूटर हार्डवेयर की क्षमताओं का उपयोग करना होता है । यह एक मास्टर कंट्रोल प्रोग्राम है जो कंप्यूटर के सभी भागों को नियंत्रित रखता है ।

या

यह प्रोग्रामिंग भाषा में लिखे गए निर्देशों अर्थात प्रोग्रामों की वह श्रृंखला है। जो कंप्यूटर सिस्टम के कार्यों को नियंत्रित करता है तथा कंप्यूटर के विभिन्न हार्डवेयरों के बीच समन्वय स्थापित करता है। ताकि किसी विशेष कार्य को पूरा किया जा सके।

              इसका प्राथमिक उद्देश्य डाटा को सूचना में परिवर्तित करना है। सॉफ्टवेयर के निर्देशों के अनुसार ही हार्डवेयर कार्य करता है‌। इसे प्रोग्रामों का समूह भी कहते हैं।

सॉफ्टवेयर के प्रकार (Types of Software)

कंप्यूटर सॉफ्टवेयर तीन प्रकार के होते हैं–

  • System Software
  • Application Software
  • Utility Software


01) सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software)

एक या एक से अधिक प्रोग्रामों का समूह जो कंप्यूटर की क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं सिस्टम सॉफ्टवेयर कहते हैं ।

System Software (Master Controlar/Software) भी कहते हैं।

  1. Operating System
  2. Mac OMX
  3. LINUX
  4. UNIX
  5. DOS


02) एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Application Software)

एक या एक से अधिक प्रोग्रामों का समूह है जिसे किसी विशेष अनुप्रयोग (Application) को हल करने के लिए बनाया जाता है इनका कार्य निश्चित होता है इसे एप्लीकेशन पैकेज कहते हैं ।

Application  S/W

  1. M.S. Office
  2. Photoshop CS
  3. Corel draw
  4. 3DS Max
  5. Sketch up
  6. Maya


03) यूटिलिटी सॉफ्टवेयर (Utility Software)

यूटिलिटी सॉफ्टवेयर को इस तरह से प्रोग्राम किए जाते हैं जिससे कंप्यूटर को और बेहतर तरीके से कार्य करने में मदद मिलती है। यूटिलिटी सॉफ्टवेयर कम्प्युटर को सुधारने का काम भी करता है और कंप्यूटर के कार्य को आसान बना देता है तथा सिस्टम को विभिन्न तरीके से सुरक्षित भी रखता है ।

Utility  S/W

  1. McAFee
  2. Kaspersky
  3. Avast
  4. AVG
  5. Norton Antivirus
  6. Bitdefender
  7. Net protector

Sunday, June 13, 2021

कंप्यूटर के लाभ और हानि हिंदी में || Advantages and Disadvantages of computer in hindi

 कंप्यूटर के लाभ और हानि की जानकारी हिंदी में

कम्प्यूटर के लाभ (Advantages of Computer)

1. यह आपको विभिन्न कार्यों को स्वचालित करने में मदद करता है जिन्हें आप मैन्युअल रूप से नहीं कर सकते हैं।

2 यह आपके डेटा और जानकारी को व्यवस्थित करने में आपकी मदद करता है।

3. इसमें एक साधारण इंसान की तुलना में बहुत अधिक कंप्यूटिंग और गणना करने की शक्ति है।

4. यह आपके काम को बहुत आसान बनाने में मदद कर सकता है।

5. कंप्यूटर एक ऐसी मशीन है जो विविध समस्याओं का समाधान करने में सक्षम है।

6. यह आपको मित्रों, सहकर्मियों और अन्य संपर्कों के साथ संवाद करने में मदद कर सकता है।

7. इसमें कई खोज इंजन हैं जो आपको जानकारी को शीघ्रता से खोजने में मदद करते हैं।


कम्प्यूटर के नुकसान/हानि (Disadvantages of Computer)

1. यदि आप ऑनलाइन और ऑफलाइन समय के बीच संतुलन नहीं बनाए रखते हैं तो यह आपके सामाजिक जीवन और अन्य लोगों के साथ बातचीत पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

2. विकिरण के कारण यह आपकी दृष्टि पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

3. इससे पिंपल्स और झुर्रियां हो सकती हैं।

4. यह आपको आपकी पढ़ाई से विचलित कर सकता है।

5. मॉनिटर के सामने बहुत अधिक समय आपकी आंखों की रोशनी पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

6. बिना व्यायाम के बहुत देर तक कंप्यूटर के सामने बैठने से वजन बढ़ सकता है।


Saturday, June 5, 2021

कंप्यूटर कितने प्रकार के होते हैं | Computer ke prakar in hindi

 कंप्यूटर कितने प्रकार के होते हैं। और उसके फायदे और नुकसान क्या-क्या है। पूरी जानकारी आइए जाने हिंदी में

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कंप्यूटरों को उनकी रुपरेखा, कामकाज, उद्देश्य तथा परियोजनाओं इत्यादि के आधार पर विभिन्न प्रकार में विभाजित किया जा सकता है जिसका संक्षिप्त वितरण निम्नवत् हैं ।

कार्य के आधार पर (Basis on Work) :-  कार्य के आधार पर कंप्यूटर तीन प्रकार के होते हैं जिनका संक्षिप्त वितरण निम्नानुसार  है ।

(01) एनालॉग कंप्यूटर (Analog Computer) 

यह ऐसा कंप्यूटर है जिसका उपयोग ज्यादातर विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्रों में किया जाता है, यह कंप्यूटर भौतिक मात्राओं को मापने में किया जाता है जैसे– तापमान, गति, लंबाई, ऊंचाई, प्रतिरोध इत्यादि का मापकर उनके परिणाम को अंको मे प्रस्तुत करने के लिए करते हैं ।

उदाहरण:– एक पेट्रोल पंप पर लगा एनालॉग कंप्यूटर पंप से निकले पेट्रोल की मात्रा को माफ कर लीटर में दिखाता है तथा उसके मूल्य की गणना करें स्क्रीन पर दिखाता है ।

Analog Computer

लाभ (Advantages)

  1. गणनाएं जो एक डिजीटल कंप्यूटर के लिए अति कठिन होती हैं, इन्हें इलेक्ट्रिक एनालॉग कंप्यूटर द्वारा बड़ी गति से किया जा सकता है।
  2. एनालॉग कंप्यूटरों को बाइनरी से एन्कोड और डिकोड करने की आवश्यकता नहीं होती है, और इसके बजाय सीधे बिजली के भौतिक गुणों का उपयोग करते हैं।
  3. एनालॉग कंप्यूटर विशेष रूप से विभेदक समीकरणों द्वारा वर्णित स्थितियों का प्रतिनिधित्व करने के लिए उपयुक्त हैं।

कमियां (Drawbacks)

  1. एनालॉग कंप्यूटर में बड़ी मात्रा में डेटा स्टोर करने के लिए डिजिटल कंप्यूटर की क्षमता नहीं होती है।
  2. उनके पास डिजिटल मशीनों की प्रोग्रामिंग द्वारा वहन की जाने वाली तार्किक सुविधाएं नहीं हैं।
  3. यद्यपि कंप्यूटिंग इकाइयों द्वारा निष्पादित अंकगणितीय कार्य डिजिटल सिस्टम की तुलना में एनालॉग मशीनों में अधिक जटिल होते हैं, एक एनालॉग मशीन में उच्च स्तर की सटीकता प्रदान करने के लिए आवश्यक हार्डवेयर की लागत अक्सर निषेधात्मक होती है।

(02) डिजिटल कंप्यूटर (Digital Computer)

वह कंप्यूटर है जो अंको की गणना करता है इस कंप्यूटर का उपयोग व्यापार चलाने के लिए घर का बजट तैयार करने के लिए किया जाता हैं । यह कंप्यूटर मात्रा में कितना के आधार पर प्रश्न का उत्तर देते हैं ।

लाभ (Advantages)

  1. डिजिटल रुप से प्रदर्शित संकेतों को शोर के कारण विकृत हुए बिना संचारित किया जा सकता है।
  2. एक संकेत का अधिक सटीक प्रतिनिधित्व प्रतिनिधित्व के लिए अधिक द्विआधारी अंकों का उपयोग करके प्राप्त किया जा सकता है।
  3. कम महंगा ।
  4. अधिक भरोसेमंद।
  5. हेरफेर करने में आसान ।
  6. लचीला ।
  7. अन्य डिजिटल सिस्टम के साथ संगतता ।
  8. केवल डिजिटाइज्ड जानकारी को बिना गिराए शोर वाले चैनल के माध्यम से ले जाया जा सकता है।
  9. एकीकृत नेटवर्क ।

हानि (Disadvantages)

  1. डिजिटल सर्किट उसी कार्य को पूरा करने के लिए एनालॉग सर्किट की तुलना में अधिक ऊर्जा का उपयोग करता है, इस प्रकार अधिक गर्मी का उत्पादन करता है जो सर्किट की जटिलता को बढ़ाता है जैसे हीट सिंक शामिल करना।
  2. डिजिटल सर्किट कभी ।
  3. प्रतिचयन त्रुटि ।
  4. डिजिटल कम्यूनिकेशन को एनालॉग की तुलना में अधिक बैंडविड्थ की आवश्यकता होती है ताकि एक ही सूचना संचरित की जा सके।
  5. डिजिटल सिग्नल की पहचान के लिए संचार प्रणाली को तुल्यकालित करने की आवश्यकता होती है, जबकि आम तौर पर यह बात एनालॉग प्रणालियों के मामले में नहीं है ।

(03) हाइब्रिड कंप्यूटर (Hybrid Computer) 

हाइब्रिड कंप्यूटर का अर्थ है अधिक गुण धर्म वाला होना अतः यह कंप्यूटर जो एनालॉग कंप्यूटर और डिजिटल कंप्यूटर दोनों के गुण हो हाइब्रिड कंप्यूटर कहलाते हैं ।

उदाहरण:– पेट्रोल पंप मशीन का कंप्यूटर एक हाइब्रिड कंप्यूटर है ।



उद्देश्य के आधार पर (Basis on Purpose) :- उद्देश्य के आधार पर कंप्यूटर दो प्रकार के होते हैं जिसका संक्षिप्त वितरण नियम अनुसार है ।

(01) जनरल पर्पस कंप्यूटर (General Purpose Computer) 

ऐसा कंप्यूटर है जिन्हें सामान्य उद्देश्य के लिए तैयार किया गया है इन कंप्यूटरों में अनेकों प्रकार के कार्य करने की क्षमता होती है इन में उपस्थित CPU की क्षमता तथा कीमत कम होती है इन कंप्यूटर का उपयोग सामान्य कार्य हेतु किया जाता है ।

जैसे- (i) एप्लीकेशन तैयार करने के लिए । (ii) डॉक्यूमेंट प्रिंट करने के लिए किया जाता है ।

सीमाएं (Limitations)

  • इसके सी.पी.यू. की क्षमता सीमित होती है इस कारण विशिष्ट अनुप्रयोग में इन्हें उपयोग में नहीं लाया जाता है ।

(02) विशिष्ट उद्देश्य कंप्यूटर (Special Purpose Computer) 

यह ऐसा कंप्यूटर होते हैं जो किसी विशेष कार्य को करने के लिए तैयार किए जाते हैं इनके सीपीयू की क्षमता उस कार्य के अनुसार होता है जिसके लिए उन्हें तैयार किया जाता है । 

इन कंप्यूटरों का उपयोग – (i) अंतरिक्ष विज्ञान (ii) मौसम विज्ञान (iii) कृषि विज्ञान (iv) चिकित्सा (v) इंजीनियरिंग के क्षेत्र में (vi) अनुसंधान एवं शोध के क्षेत्र में ।

सीमाएं (Limitations)

  • इस प्रकार के कंप्यूटर विशेष कार्य के लिए निर्मित किए जाते हैं यह केवल वही कार्य करते हैं जिसके लिए इसका निर्माण किया गया है । अन्य कार्य इस पर नहीं किए जा सकते हैं ।
  • इसकी लागत अधिक होती है ।
  • इसका आंतरिक परिपथ (Internal Circuit) जटिल होता है ।


आकार एवं क्षमता के आधार पर (Basis on Size and Capacity) :- आकार के आधार पर कंप्यूटर चार प्रकार के होते हैं जिनके संक्षिप्त विवरण निम्नानुसार है ।

(01) माइक्रो कंप्यूटर (Micro Computer) 

यह कंप्यूटर अन्य कंप्यूटरों की अपेक्षा आकार में छोटा होता है माइक्रो कंप्यूटर आकार में इतना छोटा होता है कि हम इसे डेस्क (Desk) पर सफलतापूर्वक रख या ब्रीफकेस में भी रख सकते हैं यह माइक्रो कंप्यूटर सभी प्रकार के कार्य कर सकते हैं ।

आधुनिक युग में माइक्रो कंप्यूटर फोन के आकार, पुस्तक के आकार, घड़ी के अकार में उपलब्ध है ।

इन कंप्यूटरों का उपयोग मुख्यता व्यवसाय तथा चिकित्सा के क्षेत्र में किया जाता है । जैसे- IMAC, IBM, P3/2, APPLE MAC इत्यादि ।

– माइक्रो कंप्यूटर कई प्रकार के होते हैं –

1. डेस्कटॉप कंप्यूटर (Desktop Computer) – डेस्कटॉप कंप्यूटर वे कंप्यूटर होते हैं जिन्हें के बल पर रखकर चलाया जाता है ।

2. लैपटॉप कंप्यूटर (Laptop Computer) – इन कंप्यूटरों का आकार डेस्कटॉप कंप्यूटरों की तुलना में छोटा होता है इन कंप्यूटरों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक आसानी से ले जाया जा सकता है इनमें पावर के लिए बैटरी का प्रयोग होता है ।

3. पॉम टॉप (Palmtop Computer) – यह कंप्यूटर लैपटॉप कंप्यूटर से भी छोटा होता है इसे हथेली में रखकर चलाया जाता है इनकी कार्य करने की क्षमता लैपटॉप से थोड़ी कम होती है ।

4. टेबलेट कंप्यूटर (Tablet Computer) – ये बहुत ही छोटे कंप्यूटर होते हैं । ये मोबाइल से थोड़े बड़े होते हैं । यह कंप्यूटर टचस्क्रीन होता है ।

सीमाएं (Limitations)

  • एक समय में एक ही व्यक्ति कार्य कर सकता है ।
  • कार्य करने की क्षमता कम होती है ।

(02) मिनी कंप्यूटर (Mini Computer)

माइक्रो कंप्यूटर से कुछ अधिक गति वाले, मेमोरी वाले कंप्यूटर को मिनी कंप्यूटर कहते हैं । इनमें एक से अधिक cpu हो सकते हैं जो माइक्रो कंप्यूटर से महंगे होते हैं इस कंप्यूटर पर एक ही समय पर एक से अधिक (4 से 32) लोग काम कर सकते हैं ।

इस प्रकार के कंप्यूटर से अन्य सहायक उपकरण जैसे प्रिंटर (Print), प्लॉटर (Plotter) आदि जोड़े जा सकते हैं ।

इस कंप्यूटर का उपयोग प्राय: छोटी या मध्य स्तर की कंपनी करती है । मिनी कंप्यूटर की गति 10 से 30 MIPS (Million Instructions Par Second) होती हैं । जैसे – HP900, RISC 600, BULL HN-DPX2 और AS 400 आदि ।



सीमाएं (Limitations)

  • यह माइक्रो कंप्यूटर की अपेक्षा महंगे होते हैं ।
  • इसका आंतरिक परिपथ (Internal Circuit) जटिल होता है ।
मिनी कंप्यूटर के लाभ (Advantages of Mini computers)

  1. इसकी सामर्थ्य यानी लागत प्रभावी छोटे व्यवसाय जो अतीत में एक महंगा केंद्रीय कंप्यूटर खरीदने में असमर्थ थे, उन्होंने पाया है कि वे अब मिनी कंप्यूटर खरीद सकते हैं।
  2. यह आमतौर पर समर्पित कंप्यूटर के रूप में उपयोग किया जाता है, अर्थात, विशेष रूप से एक प्रसंस्करण कार्य के लिए उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए, कार्यक्रम के विकास या पेरोल की तैयारी के लिए।

(03) मेनफ्रेम कंप्यूटर (Mainframe Computer) 

मेनफ्रेम कंप्यूटर मिनी कंप्यूटर से कुछ गति व अधिक क्षमता वाले होते हैं । यह कंप्यूटर अकार में बहुत बड़े होते हैं इन कंप्यूटरों में डाटा को तीव्र गति से प्रोसेस करने की क्षमता अधिक होती है तथा इस कंप्यूटर में एक साथ सैकड़ों व्यक्ति कार्य कर सकते हैं इन कंप्यूटरों को एयर कंडीशनिंग की आवश्यकता होती है जिससे इसका तापमान नियंत्रित रहे । इन कंप्यूटर का मूल्य बहुत अधिक होता है । 

Mainframe Computer

इसका उपयोग प्राय:  (i) बड़ी औद्योगिक कंपनियों में (ii) रेलवे आरक्षण (iii) रिसर्च संगठनों में (iv) इंश्योरेंस कंपनीयों में (v) बिलों को भेजने (vi) कर्मचारियों का भुगतान करने (vii) सरकारी विभाग में केन्द्रीय कंप्यूटर के रूप में इत्यादि कार्यों में किया जाता है; जैसे – CRAY -1, CDS-CYBER, IBM 4381, ICL 39, UNIVAC-1110 आदि ।

सीमाएं (Limitations)

  • अधिक महंगे होते हैं ।
  • विशेष शक्ति (Power) व वातानुकूलित प्रयोगशालाओं अथवा कक्षाओं की आवश्यकता होती है ।
लाभ (Advantages)
  1. प्रति सेकंड हजारों लेनदेन का समर्थन करता है ।
  2. एक साथ हजारों उपयोगकर्ताओं और अनुप्रयोगों की सेवा कर सकता है ।
  3. बड़ी मात्रा में डेटा का प्रबंधन करने में सक्षम ।
  4. क्लाइंट-सर्वर नेटवर्क की तुलना में अधिक विश्वसनीय और सुरक्षित ।
  5. लीगेसी मेनफ़्रेम सॉफ़्टवेयर के साथ पश्चगामी संगतता, जो तब उपयोगी होती है जब आपके संगठन ने पहले से ही मेनफ़्रेम कंप्यूटिंग में भारी निवेश किया हो ।
नुकसान (Disadvantages) 
  1. मेनफ्रेम ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ पश्च-संगतता की आवश्यकता है।
  2. सिस्टम को चलाने के लिए डेडिकेटेड स्टाफ की जरूरत होती है।
  3. क्लाइंट-सर्वर नेटवर्क की तुलना में प्रारंभिक स्टार्ट-अप लागत अधिक हो सकती है - जो छोटे से शुरू हो सकती है और बाद में विस्तारित हो सकती है। आपको बस एक छोटा क्लाइंट-सर्वर सिस्टम चाहिए।
  4. डिफ़ॉल्ट रूप से, सिस्टम में कोई भौगोलिक वितरण नहीं बनाया गया है, और यह कुछ ऐसा है जिसे क्लाइंट-सर्वर नेटवर्क के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  5. वे बहुत अधिक जगह ले सकते हैं और उन्हें समर्पित पर्यावरण प्रबंधन की आवश्यकता होती है, उदाहरण के लिए, शीतलन प्रणाली।

(04) सुपर कंप्यूटर (Super Computer)

सुपर कंप्यूटर सबसे अधिक गति वाले या अधिक क्षमता वाले कंप्यूटर होते हैं इसमें अधिक सीपीयू लगा सकते हैं सुपर कंप्यूटर में एक से अधिक व्यक्ति काम कर सकते हैं यह कंप्यूटर अधिक महंगे होते हैं ।

Super Computer


इस कंप्यूटर का उपयोग – (i) वैज्ञानिक शोध प्रयोगशालाओं में (ii) मौसम भविष्यवाणी में (iii) अंतरिक्ष शोध प्रयोगशालाओं में (iv) एनिमेशन तथा चलचित्र का निर्माण करने मेंं (v) शोध कार्य और खोज करने में, सैन्य और वैज्ञानिक अनुसंधान इत्यादि कार्यों में किया जाता है; जैसे – PARAM, PARAM 10000, CRAY -1, CRAY -2, NEC-500 आदि ।

भारत में पहला सुपर कंप्यूटर CDAC पुणे में निर्मित किया गया है जिसका नाम परम (PARAM) है इसका विकसित रूप परम 10000 भी तैयार कर लिया गया है

सुपर कंप्यूटर के अन्य उदाहरण – CRAY-3 (Control Data Corporation), Cyber 205 (ETA System incorporation)

लाभ (Advantages)

  1. अधिक आसानी से बिट्स (qubits) को एन्कोड करें ।
  2. क्वांटम एल्गोरिथ्म आश्चर्यजनक रूप से तेजी से परिणाम देता है ।
  3. शास्त्रीय कंप्यूटिंग के सभी कार्य कर सकते हैं ।
  4. क्यूबिट्स एक साथ 0 और 1 के रूप में मौजूद हो सकते हैं ।
  5. केवल एक ही प्रोसेसर की जरूरत है ।

नुकसान (Disadvantages)

  1. वर्तमान में हमारी पहुंच से बाहर ।
  2. "सुसंगत राज्य" क्वांटम कंप्यूटर संचालन के लिए मौलिक है, कुछ हद तक बेकाबू है ।
  3. हम अक्सर क्वांटम घटना पर ठोकर खाते हैं, शायद ही कभी उन्हें नियंत्रित करने की कोशिश करें ।
  4. परमाणु ऊर्जा अवस्था को बहुत तेजी से बदलते हैं, गणना करना कठिन बनाता है ।


कम्‍प्‍यूटर का इतिहास क्या है? (History of Computer in hindi)

कम्प्यूटर की पीढ़ीयां क्या क्या हैं? उसके उपयोग और विशेषता क्या है? (Computer Generations in hindi)

Wednesday, June 2, 2021

कम्‍प्‍यूटर का इतिहास क्या है? History of Computer in hindi

 कंप्यूटर का इतिहास क्या है आइए जानें पूरी जानकारी हिंदी में


Introduction – कंप्यूटर एक तीव्र शत प्रतिशत सही प्रमाण देने वाले इलेक्ट्रॉनिक मशीन है जो संग्रहण किए गए डाटा के आधार पर या यूजर से प्राप्त डाटा को आउटपुट के रूप में प्रदान करता है ।

'कंप्यूटर' शब्द कंप्यूट (Compute) से बना है जिसका अर्थ होता है  'गणना' । अत: कंप्यूटर का अर्थ है गणना करने वाली मशीन ।

कंप्यूटर का फुल फॉर्म हिंदी में –

  • C Commonly (आमतौर पर)
  • O Operated (संचालित)
  • M Machine (मशीन)
  • P Particularly (विशेष रूप से)
  • U Used for (के लिए इस्तेमाल होता है)
  • T Technical (तकनीकी)
  • E Education and (शिक्षा और)
  • R Research (अनुसंधान)

प्रयोगकर्ता इनपुट (की बोर्ड, माउस इत्यादि) की सहायता से डाटा कंप्यूटर को देता है दिए गए निर्देश के अनुसार कंप्यूटर प्राप्त डाटा का प्रोसेसिंग करता है एवं आउटपुट उपकरणों के द्वारा परिणाम यूजर को प्रदान करता है कंप्यूटर शत प्रतिशत सही प्रणाम देने वाली इलेक्ट्रॉनिक मशीन है, कंप्यूटर तब ही गलत परिणाम देता है जब यह तो यूजर के द्वारा गलत डाटा इनपुट दिया गया हो या प्रोसेसिंग के लिए गलत निर्देश दिया गया हो । 

          आज के दैनिक जीवन के हर क्षेत्र में कंप्यूटर में अपना स्थान बनाने में सफलता प्राप्त कर ली है कंप्यूटर की निरंतर बढ़ती क्षमताओं के फलस्वरुप इसका उपयोग नवीन क्षेत्रों में बढ़ाया जा रहा है उदाहरण के लिए हमारे बिजली तथा टेलीफोन के बिल कंप्यूटर द्वारा प्रिंट करके भेजे जाते हैं, रेलगाड़ियों और हवाई जहाज के सीटों का आरक्षण कंप्यूटर द्वारा किया जा रहा है, और तो बैंकों में अधिकतर कार्य कंप्यूटर की सहायता से ही होने लगी है कंप्यूटर की सहायता से हम एक नगर से दूसरे नगर अथवा एक देश से दूसरे देश में अपने संदेश ई-मेल की सहायता से कुछ क्षणों में भेज सकते हैं । 

           हम विश्व के किसी भी कोने में हम अपनी मनपसंद वस्तुओं में इंटरनेट के माध्यम से खरीदने या बेचने में सक्षम हो गए हैं, कंप्यूटर से गिने-चुने जगहों पर काम में आने वाली दुर्लभ मशीन नहीं रह गई है, बल्कि घरेलू उपयोग की वस्तु बनती जा रही है इसलिए वर्तमान युग को कंप्यूटर का युग कहा जाने लगा है । 

                                              आज कंप्यूटर का उपयोग फिल्म निर्माण, उद्योग, व्यापार, शोध, यातायात नियंत्रण और अंतरिक्ष जगत का कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं है, जहां कंप्यूटर की आवश्यकता महसूस न की जा रही हो ऐसे अनेकों जगहों में कंप्यूटर को उपयोग में लाया जा रहा है । 


कंप्यूटर का इतिहास (History of Computer) 

आज के इस युग में कंप्यूटर का विकास कई वर्षों पुराना है, कंप्यूटर का विकास गणितीय गणनाओं को आसानी से करने के लिए किया गया था आज के दौर में कंप्यूटर का प्रयोग गणितीय गणनाओं के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के कार्यों में भी किया जाता है । 

कंप्यूटर के विकास के क्रम को तीन भागों में बांटा गया है । 

कम्प्यूटर का विकास (Development of Computer) 

1. डार्क ऐज (Dark Age : 3000BC - 1890AD) 

2. मिडिल ऐज (Middle Age : 1890 - 1944) 

3. मॉर्डन ऐज (Modern Age : 1944 अब तक) 


1. डार्क ऐज (Dark Age) 

पहले के सभी कंप्यूटर इलेक्ट्रो-मैकेनिकल थे। डार्क एज का इतिहास अबेकस से शुरू हुआ इससे पहले मनुष्य गणना के लिए छोटे पत्थर या धातु पर खरोंच करके गणना का कार्य करते थे । 

अबेकस (Abacus)

अबेकस गणना की प्राचीनतम मशीन मानी जाती है । 

इस उपकरण में एक लकड़ी का फ्रेम होता है जो दो भागों में बांटा रहता है ऊपरी भाग को हैवन तथा निचले भाग को अर्थ कहा जाता है इस फ्रेम में क्षैतिज छड़ें लगी होती है जिसमें गोल मोती लगे होते हैं इस मोतियों को एक तरफ से दूसरी तरफ से खिसकाकर गणना की जाती है। सबसे ऊपर वाली लाइन इकाई, दूसरी लाइन दहाई, तीसरी लाइन सैंकड़ा......… .. अंको का मान व्यक्त करती है । 

अबेकस का नियमित रूप से उपयोग करने वाला व्यक्ति अबेकस के द्वारा केलकुलेटर के समान तेज गति से गणनाएं कर सकता है । 

इसका आविष्‍कार सन् 1602 में चीन में हुआ था । 

अबेकस का नियमित रूप से उपयोग करने वाला व्यक्ति अबेकस के द्वारा कैलकुलेटर के समान तेज गति से कार्य कर सकता हैं । 

विशेषता (Trait)–

  1. सबसे पहला एवं सरल यन्त्र। 
  2. क्षैतिज (Horizontal) तारों में गोलाकार मोतियों के द्वारा गणना की जाती है। 

अनुप्रयोग–

  1. अबेकस का प्रयोग जोड़ने व घटाने के लिए किया जाता था। 
  2. इसका प्रयोग वर्गमूल निकालने के लिए किया जाता था।

एनालॉग मशीन एवं नेपियर्स बोन्‍स (Analog Machine and Nepier's Bones)

अबेकस के बाद सन् 1617 में स्कॉटलैंड के एक गणितज्ञ जॉन नैपियर (John Napier) में हड्डियों की छड़ों का प्रयोग कर एक ऐसी मशीन का निर्माण किया जो गुणा (Multiplication) का कार्य भी कर सकती थी इसलिए इस मशीन का नाम नेपियर बोंस रखा गया ।

इसका आविष्कार सन् 1617 में जॉन नैपियर द्वारा स्कॉटलैंड (Scotland) में हुआ था। 

विशेषता (Trait)–

  1. 10 आयताकार पट्टीयों पर 0 से 9 तक के पहाड़े इस प्रकार लिखे जाते हैं कि एक पट्टी के दहाई के अंक दूसरी पट्टी के इकाई अंकों के पास आज जाते थे। 
  2. गणना के लिए प्रयोग में आने वाली प्रौद्योगिकी को राबडोलोगिया कहते हैं। 

अनुप्रयोग–

  1. गुणा अत्‍यंत शीघ्रता पूर्वक की जा सकती थी। 
  2. गणनात्मक परिणाम को ग्राफिकल संरचना द्वारा दर्शाया जाता था। 

ब्लेज पास्कल का यांत्रिक कैलकुलेटर (Mechanical Calculator of Mechanical Machine)

सन 1642 मे ब्लेज पास्कल ने पहली यांत्रिक मशीन बनाई जो जोड़ वह बाकी का कार्य कर सकती थी पास्कल ने इस मशीन आविष्कार अपने पिता की मदद करने के लिए किया ।


पास्कल इस मशीन में कई गियरों व पहियों का उपयोग किया पहले पहिए में 10 खंड थे जैसे वर्तमान की स्कूटर और कारों में किलोमीटर मापने के लिए स्पीडोमीटर काम करते हैं। 
इसी तरह दूसरे मशीन की विकास की प्रक्रिया भी शुरू हो गई और दूसरी मशीन का निर्माण 1684 में गॉट फ्रेंड लैबनीज ने किया या मशीन एक वास्तविक केलकुलेटर सिद्ध हुआ क्योंकि इसके जरिए जोड़ एवं घटाव के अलावा गुना एवं भाग करना भी संभव हो गया अर्थात बड़ी घटनाओं को हल करना कुछ सरल हो गया। 

इसका आविष्कार सन् 1642 में ब्लेज पास्कल के द्वारा फ्रांस में हुआ था। 

विशेषताएँ–
  1. यह प्रथम मैकेनिकल एडिंग मशीन है।यह मशीन ओडोमीटर एवं घड़ी के सिद्धांत पर कार्य करती है। 
अनुप्रयोग–
  1. संख्‍याओं को जोड़ने और घटाने के लिए प्रयोग किया जाता था । 

जैकार्ड की लूम मशीन (Jacquard's Loom Machine) 

जोसेफ मैरी जैकॉर्ड (1752-1834) फ्रांस का एक बुनकर और टैक्सटाइल इंजिनियर था सन 1801 में उसने एक ऐसी बुनाई मशीन का निर्माण किया जिसमें बुनाई की डिजाइन डालने में छिद्रों किए हुए कार्डों का उपयोग किया जाता था ये कार्ड एक अत्यंत अन्तहीन श्रृंखला में एक के बाद एक आते रहते थे इसलिए वह कार्डों पर किए हुए छिद्रों के अनुसार बुनाई की डिजाइन डालने में असमर्थ हो जाता था दूसरा शब्दों में हम कह सकते हैं कि बुनाई की डिजाइन का इनपुट उनका कार्डों पर था । 
         जैकार्ड की इस खोज का असली महत्व काफी समय बाद चार्ल्स बैबेज ने पहचाना वास्तव में उन्होंने अपने एनालिटिकल इंजन की जो डिजाइन तैयार की थी उसमें इनपुट देने का कार्य छिद्र किए हुए कार्डों द्वारा ही किया जाना था । 
इसका आविष्कार सन् 1801 में जोसेफ मैरी जैकॉर्ड के द्वारा फ्रांस में हुआ था। 

विशेषता (Trait)–
  1. यह एक ऐसी बुनाई मशीन थी, जिसमें बुनाई के डिजाइन डालने के लिए छिद्र किए हुए कार्डों का उपयोग किया जाता था। 
  2. यह एक मैकेनिकल लूम था। 
अनुप्रयोग–
  1. इसका प्रयोग कपड़े बुनने के लिए किया जाता था। 

चार्ल्स बैबेज का डिफरेंस व एनालिटिकल इंजन (Difference and Analytical Engine of Charles Babbage)

चार्ल्स बैबेज (Charles Babbage) कंप्यूटर इतिहास के महान व्यक्ति थे जिन्होंने सन 1822 ईसवी में डिफरेंस इंजन का निर्माण किया चार्ल्स बैबेज को आधुनिक कम्प्यूटर का जन्मदाता माना जाता है क्योंकि सर्वप्रथम बैबेज ने ही कंप्यूटर अविष्कार का महत्वपूर्ण परिकल्पना की थी ।

चार्ल्स बैबेज को आज के आधुनिक डिजिटल कंप्यूटर का पिता कहा जाता है ।

इस मशीन में गियर व सॉफ्ट लगे थे तथा यह भाप से चलती थी यह पूर्णत: स्वचालित मशीन (Automatic machine) थी यह 60 जोड़ एक मिनट में कर सकती थी एवं इसमें मेमोरी भी थी यह प्रोग्राम के निर्देशक द्वारा नियंत्रित होती थी ।

इसका आविष्कार सन् 1833 में चार्ल्स बैबेज के द्वारा इंग्लैंड में हुआ था। 

विशेषता (Trait)–

  1. यह प्रथम जनरल पर्पज कंप्यूटर है। 
  2. इस मशीन को आधुनिक कम्‍प्‍यूटरों का प्रारूप माना जाता है। यह एक मैकेनिकल मशीन है। 

अनुप्रयोग–

  1. इसका प्रयोग सभी गणितीय सक्रियाएँ करने में किया जाता था। 

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